Sambhog Na Kar Pane Ki Manovaigyanik Chikitsa संभोग न कर पाने की मनोवैज्ञानिक चिकित्सा

Sambhog Na Kar Pane Ki Manovaigyanik Chikitsa संभोग न कर पाने की मनोवैज्ञानिक चिकित्सा

Sambhog Na Kar Pane Ki Manovaigyanik Chikitsa

संभोग की मनोवैज्ञानिक चिकित्सा-

नपुंसकता और संभोग न कर सकने के रोग का मस्तिष्क और तंत्रिका में गहरा संबंध है। दिमाग में सबसे पहले सेक्स का विचार उत्पन्न होता है, तब मस्तिष्क की मर्दाना जननेन्द्रियों से संबंध रखने वाली तंत्रिका द्वारा उनका प्रभाव मर्दाना जननेन्द्रियों पर पड़कर उनमें उत्तेजना उत्पन्न होने लग जाती है और बाकी के शरीर का रक्त मर्दाना जननेन्द्रियों में पहुंच जाता है।

जिन मर्दों के दिमाग में यह भ्रम बैठ जाता है कि वे स्त्री के पास जाकर भली प्रकार सेक्स नहीं कर सकेंगे, उनकी स्नायु एवं तंत्रिका इसी भ्रम के कारण सेक्स के समय अननेन्द्रियों में उत्तेजना उत्पन्न नहीं कर सकती और वह भला-चंगा और ताकतवर होने पर भी इसी भ्रम के कारण दैहिक मिलन नहीं कर सकता है, जिससे उसका यह भ्रम और बढ़ जाता है। यही कारण है कि उन्माद के पुराने रोगियों के मस्तिष्क तंत्रिका एवं स्नायु रोग ग्रस्त होने के कारण नपुंसक न होने पर भी उनमें दैहिक मिलन की इच्छा पैदा नहीं होती है।

इसलिए आपके पास जब भी मैथुन में असफल या पुराने रोग से ग्रस्त कोई भी रोगी आये तो उसको साहस दें कि तुम्हें केवल वहम यानी भ्रम है। तुम्हारा रोग बिल्कुल मामूली है और थोड़े समय में रोगमुक्त हो जाओगे। इन शब्दों का रोगी पर बहुत अच्छा और गहरा प्रभाव पड़ेगा और बिना दवा खाये उसका रोग कम होने लग जाता है। डाॅक्टर, जो रोगी को बेवजह डरा देते हैं कि तुम्हारा रोग बहुत भयानक है, रोगी को लाभ पहुंचाने के बदले भारी नुकसान पहुंचाते हैं।

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गुप्त रोगों में ग्रस्त रोगी की जननेन्द्रियों का भली प्रकार निरीक्षण करें। उससे पिछले काल के रोगों की हिस्ट्री और इस रोग का कारण पूछें। छोटी आयु में उसको हस्तमैथुन या अप्राकृतिक विधियों से वीर्यनाश करने की आदत तो नहीं थी। हिप्नाॅटिज्म जानने वाले चिकित्सक रोगी को इस विद्या से बेहोश करके उससे इस रोग का वास्तविक कारण, पिछली आयु के गुप्त भेद ज्ञात करने में सफल हो सकते हैं। बेहोशी में उसके मन पर प्रभाव डालकर उसका रोग भी दूर करने में सफल हो सकते हैं।

यदि उसकी शादी हो चुकी है, तो उसकी स्त्री से रोग निरीक्षण करने और उसके पति को वास्तव में क्या कष्ट है, पूछताछ करके सहायता मिल सकती है। कई मर्दों को मैथुन करने का पूर्ण ज्ञान नहीं होता है। ऐसे मर्दों को मैथुन करने की उचित विधियों के बारे में समझाना व बताना चाहिए।

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संभोग न कर सकने का भ्रम दूर करने की विधि-

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अधिकतर मर्द ऐसे होते हैं, जिनको अंदर ही अंदर यह भ्रम हो ता है कि मैथुन के दौरान वह स्त्री को संतुष्ट नहीं कर पायेंगे। वह इसमें पूरी तरह असफल रहेंगे। अपने इसी भ्रम के कारण ऐसे पुरूषों के स्नायु जनेन्द्रियों में पूरी उत्तेजना उत्पन्न नहीं हो पाती और जिस कारण वे वास्तवक में दैहिक मिलन में असफल हो जाते हैं और अपने को कोसने लगते हैं।

वैद्यों, डाॅक्टरों के पास कई ऐसे मर्द भी आते हैं, जो देखने में हट्टे-कट्टे और ताकतवर होते हैं, परन्तु उनके मन में मैथुन करने का विचार ही नहीं आता। कई मर्द दूसरी स्त्रियों से तो सफलता से मैथुन कर सकते हैं, परन्तु अपनी स्त्री से सेक्स करने पर उनको भ्रम हो जाता है कि वह दैहिक मिलन नहीं कर सकते हैं। ऐसे रोगियों के रोग का मनोवैज्ञानिकी निरीक्षण करके चिकित्सा करने में सफलता मिल सकती है।

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मनुष्यो में जीवों में सेक्सक्रीड़ा की प्रेरणा और सेक्सक्रीड़ा की अप्राकृतिक विधियां (Sexual Perversions And Behavior)-

ईश्वर ने मनुष्य, पशुओं और तमाम जीवों में सेक्सक्रीड़ा की तीव्र शक्ति भर दी है। सेक्स की अन्तःप्रेरणा मनुष्यों और तमाम जीवों में दूसरी समस्त इच्छाओं से बलवान है। सेक्सक्रीड़ा के विचार हर जीव के मन में स्वतः उत्पन्न हो जाते हैं। चूमने, जननेन्द्रियों को मलने रगड़ने से मैथुन इच्छा भड़क उठती है।

बहुत छोटे बच्चों की इन्द्री नींद में खड़़ी हो जाती है। बच्चे बार-बार अपनी इन्द्री को पकड़ लेते हैं। उनको पता नहीं होता है कि ऐसा करना अच्छा है या बुरा है। परन्तु ये दोनों बातें स्वाभाविक कही जा सकती हैं। जब लड़का या लड़की जवान होने लग जाते हैं तो उनकी सेक्स ग्रन्थि जनेन्द्रियों से संबंधित ग्लैण्डों में हार्मोन उत्पन्न होने लग जाने पर उनमें ऐसे विचार स्वयं उत्पन्न होने लग जाते हैं या दूसरे मित्र उनको ऐसी बातें सिखा देते हैं।

अज्ञानता और बुरी संगत में पड़कर छोटी आयु के लड़के और लड़कियां अपनी कच्ची कामवासना को नासमझी में बिना सोचे-समझे पूरा करने की विधियां निकाल लेते हैं।

जब एक लड़का दूसरे लड़के, एक मर्द दूसरे मर्द से या एक लड़़की दूसरी लड़की से मिलकर कामवासना की पूर्ति के लिए मैथुन
करते हैं तो इसको समलैंगिक मैथुन क्रिया कहते हैं। जब छोटा लड़का किसी लड़की से नासमझी में ऐसा करता है तो इसको इतरलैंगिक मैथुन(Hetero-Sexual) क्रिया कहा जाता है।

कई नासमझ अपनी कामवासना पशुओं से मैथुन करके पूरी करते हैं। कई लड़के या पुरूष समलैंगिक सेक्स कर लेते हैं या फिर हस्तमैथुन करके अपनी हवस शांत करते हैं। कई मर्द लड़कियों, स्त्रियों को कंधा मारकर, उनको घूर कर, उनकी जनेन्द्रियों पर चुटकी काटकर, सुंदर स्त्रियों को देखकर अपने दिल की भड़ास निकालते हैं।

अमेरिका में लाखों ऐसे लोग हैं, जो स्त्रियों के बजाए लड़कों से मैथुन करना पसंद करते हैं। उनको समलैंगिक मैथुन प्रेमी कहा जाता है। इस प्रकार की बुरी आदतों की चिकित्सा करना और रोगी को यह आदत छोड़ देने को तैयार करना आसान काम नहीं है। इसके लिए अथक प्रयास करना पड़ता है। ऐसी बुरी लत की विधियों से रोगी के स्वास्थ्य को भारी हानि पहुंचती है।
रोगी को इन बुरी विधियों को छोड़ने के लिए बड़े प्रेम से समझायें। रोगों से घृणा न करेें। उसको बुरी संगत से बचायें। अकेला न रहने दें। मनोवैज्ञानिक चिकित्सा इन बुरी आदतों को छुड़ाने में अधिक सफल रहती है।

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