Sambhog Kise Kehte Hain Aur Kaise Karte Hain? संभोग किसे कहते हैं और कैसे करते हैं?

Sambhog Kise Kehte Hain Aur Kaise Karte Hain? संभोग किसे कहते हैं और कैसे करते हैं?

संभोग परिचय-

संभोग क्रिया को सेक्स, मैथुन, सेक्सुअल इंटरकोर्स आदि के नाम से भी जाना जाता है। संभोग क्रिया स्त्री-पुरुष के द्वारा किया जाने वाले बहुत ही व्यक्तिगत कार्य होता है। यह स्त्री और पुरूष के द्वारा किया जाने वाला वो भोग होता है, जिसे भोगने में उन्हें बेहद आनंद की अनुभूति होती है। इसे ही संभोग कहते हैं। पुरुष और स्त्री के द्वारा साथ में किया गया आनंददायक भोग(सम्भोग) है। जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है संभोग यानी समान किया गया भोग ही सही मायनों में संभोग कहलाता है, जिसमें स्त्री और पुरूष को समान आनंद और तृप्ति प्राप्त होनी चाहिए।

sexual intercourse केवल आनंद के लिए की जानी वाली काम-क्रीड़ा ही नहीं है, बल्कि इसको करने से नए जीवन की प्यार भरी शुरुआत होती है। यह पति-पत्नी के रिश्ते के बीच की बहुत ही अहम कड़ी है। इसको करने के लिए विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है, कि इस भोग में दोनों ही पूर्ण आनंद लें। इसलिए, यह जरूरी है कि दोनों की मनोदशा अच्छी हो और दोनों शारीरिक मिलन के लिए पूरी तरह से उत्तेजित हों। कामेच्छा को बढ़ाने में फोरप्ले करना बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। सही प्रकार से फोरप्ले किए बिना संभोग में चरम को पाना मुश्किल हो जाता है।

शारीरिक मिलन क्रिया में पुरुष अपने गुप्तांग को स्त्री के यौनांग में प्रवेश करवाता है। यह आहिस्ते-आहिस्ते किया जाना चाहिए, जिससे स्त्री को बहुत कष्ट न सहना पडे़। कुंवारी लड़की के लिए First sexual intercourse का अवसर बहुत कष्टदायी हो सकता है और इसलिए उस दिन ल्यूब क्रीम लगाकर कुछ हद तक यह असुविधा कम हो सकती है।

लिंग का योनि में प्रवेश होने पर इसे लयबद्ध गति से पुरुष द्वारा आगे-पीछे किया जाता है, जब तक दोनों पार्टनर अपने आखिरी चरम तक नहीं पहुंचते। चरम जननांग क्षेत्र से शुरू होता है और पूरे शरीर में फैल-सा जाता है।

पुरुष में, sexual intercourse सामान्यतः वीर्य के स्खलित होने के साथ पूरा होता है। स्त्री में, योनि से एक सफेद पानी सा जाता है, जिससे योनि की मांसपेशीयाँ आराम महसूस करती हैं। चरम को प्राप्त होने पर पुरुष का गुप्तांग फिर से शिथिल हो जाता है और स्त्री के यौनांग से आसानी से बाहर आ जाता है।

Sambhog Kise Kehte Hain Aur Kaise Karte Hain?

दैहिक संबंध स्थापित करने वाले पति-पत्नी व कपल को गर्भनिरोधक उपकरणों के बारे में पता होना चाहिए जो उपलब्ध हैं। कंडोम या गर्भनिरोधक गोलियों की मदद से अनचाहे गर्भ से बचा जा सकता है, जिसके लिए डॉक्टर से परामर्श किया जाना चाहिए। सुरक्षित शारीरिक मिलन का अर्थ है, शारीरिक मिलन के दौरान सर्तकता बरतना, जिससे आप यौन संचारित बीमारी(एसटीडी) से बच सकें। इन रोगों में जननांग हर्प्स, जननांग वार्ट, एचआईवी, क्लैमिडिया, गोनोरिया, सिफलिस, हेपेटाइटिस बी और सी और अन्य शामिल हैं।

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क्या लिंग का आकार महत्व रखता है?

sexual intercourse में पूर्ण आनंद पाने के लिए लिंग का आकार कैसा और कितना होना चाहिए, यह प्रश्न में बहस का मुद्दा हो सकता है। इस विषय में अलग-अलग लोगों की अलग सोच व राय हो सकती है। कुछ पुरुषों को इसको लेकर बहुत एंग्जायटी रहती है, जो उनकी सेक्स जीवन को प्रभावित कर सकती है।

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लिंग के साइज को लेकर कुछ तथ्य इस प्रकार हैं:-

हर स्त्री के लिए केवल लिंग का आकार ही सब कुछ नहीं होता। उनके लिए यह बातें भी बहुत मायने रखती हैं कि उनका पार्टनर व साथी उन्हें प्यार कितना करता है, भावनाओं की कद्र करता है व उसके लिए कितना समर्पित है।
लिंग का आकार छोटा होने पर भी पुरुष के पिता बनने की संभावना में कमी नहीं आती। पुरुष का अपनी स्त्री के लिए प्यार, देखरेख और समपर्ण महत्वपूर्ण है।

मैथुन के लिए लिंग के साइज से पुरुषों में तनाव हो सकता है, जिससे उन्हें मैथुन के समय पूर्ण आनंद नहीं मिल पाता है। स्त्री के लिए चरम पाने के लिए लिंग का आकार बहुत ज्यादा महत्व नहीं रखता। चरम तक पहुंचने के लिए अच्छे फोरप्ले, क्लाइटोरिस को सहला कर और ओरल सेक्स भी किया जा सकता है। जननांगों को हाथ से उत्तेजित करने से भी समान रूप मैथुन चरम मिल जाता है।

Sambhog Kise Kehte Hain Aur Kaise Karte Hain?

उचित आनंददायक मैथुन के लिए लिंग के आकार का कोई तय मापदंड नहीं है। लिंग बड़ा हो या छोटा, मैथुन में सभी का कार्य एक ही है। अगर कोई इसके आकार को ही सब कुछ मानता है, तो यह सही नहीं है। हर पुरुष को अपना लिंग दूसरों से कमतर ही लगता है। बड़ा लिंग किसी भी प्रकार से अच्छे शारीरिक मिलन की पक्के तौर पर गारंटी नहीं देता। बल्कि कई बार तो बड़ा लिंग स्त्री की योनि में प्रवेश करते हुए सर्विक्स तक पहुंच सकता है, जिससे दर्द, सूजन आदि की परेशानी हो सकती है, इसलिए यह भ्रम अपने दिमाग से निकाल दें कि बड़ा लिंग ही मैथुन में उचित है। इससे अपनी सेक्स लाइफ पर बुरा असर नहीं होने दें। पति या पत्नी दोनों में से किसी की भी एक-दूसरे के लिए नकरात्मक सोच, उनके रिश्तों में कड़वाहट ला सकती है और कम से कम इस तरह के फैक्टर के लिए तो ऐसा बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए। एक-दूसरे को सच्चे दिल से प्यार करें, एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें और समपर्ण रखें। यही अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है, बाकि सभी कुछ परे है।

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अच्छे संभोग की समय अवधि कितनी होनी चाहिए?

हर पुरुष के मन में एक प्रश्न ज्यादा उठता रहता है कि क्या वह अपनी स्त्री को पूर्ण रूप से तृप्त कर पाने में सक्षम है? यह सवाल मन में इसलिए भी उठता है क्योंकि हम अश्लील फिल्मों में देखते हैं कि पुरूष, अपनी महिला साथी के साथ 30-40 मिनट तक लगातार मैथुन करते रहते हैं, वो भी बिना थके, इसलिए मैथुन में समय को लेकर हम परेशान हो जाते हैं। आइए जान लेते हैं सही मैथुन के लिए कितनी समय अवधि उचित है।

वर्ष 2008 में अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में कनाडा और अमेरिका के कई डॉक्टरों को बुलाया गया। डॉक्टरों ने मैथुन की सही अवधि के बारे में कई दिलचस्प बातें बताईं थी। डॉक्टरों का मानना था, कि पार्टनर के साथ मैथुन की अवधि दोनों की मनोदशा यानी मूड पर निर्भर करती है। हालांकि लोगों के मन में फिर भी मैथुन की समयावधि को लेकर परेशानी बनी रहती है।

चिकित्सक ने बताया कि यदि आप तीन मिनट तक सेक्स करने में समर्थ हैं तो आपको परेशान होने की बिल्कुल आवश्कता नहीं है। मगर आप 3 मिनट से कम में ही स्खलित(शीघ्रपतन) हो रहे हैं, तो यह सोचनीय विषय है। उनके अनुसार यदि आप 3-7 मिनट के बीच स्खलित हो रहे हैं, तो हो सकता है कि आपका पार्टनर तृप्त न हो।
डॉक्टर्स का इशारा स्पष्ट था, कि अगर आपकी पार्टनर की सेक्शुअल ड्राइव आपसे ज्यादा है तो 3-7 मिनट का समय अंतराल कम हो सकता है।

सेक्स की समय अवधि यदि आप 13 मिनट तक खींचने में कामयाब रहते हैं, तो आपकी स्थिति नाॅर्मल है। डॉक्टर्स के अनुसार 3 से 13 मिनट के समय वाला सेक्स, सामान्य सेक्स के अंर्तगत आता है।

जिस व्यक्ति की सेक्स समय अवधि ज्यादा होती है और वह पूरी तरह तंदुरूस्त हो तो सेक्स की अवधि 30 मिनट तक जा सकती है। हालांकि 30 मिनट तक दैहिक संबंध की क्षमता रखने वाले पुरुष को इतनी ही सेक्शुअल ड्राइव की पार्टनर मिलनी चाहिए। वरना सेक्स में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

सारी बातों का निचैड़ निकाला जाये, तो सेक्स दो लोगों का मधुर मिलन होता है। मिलन के दौरान दोनों पार्टनर्स की आपसी सहमति, अच्छा मूड, स्वास्थ्य, आहार, नींद इत्यादि पर भी निर्भर करता है, इसलिए सेक्स की समयावधि के बारे में ज्यादा ना सोचें और सेक्स यानी मिलन का पूरा-पूरा आनंद लें।

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