Sambhog Ki Vishishat Jaankari Aur 10 Khas Vidhiyan संभोग की विशिष्ट जानकारी और 10 खास विधियां

Sambhog Ki Vishishat Jaankari Aur 10 Khas Vidhiyan संभोग की विशिष्ट जानकारी और 10 खास विधियां

संभोग की विशिष्ट जानकारी

संभोग(रति) की मुख्य 3 अवस्थायें होती हैं, जो इस प्रकार है..

1. संभोग के लिए आमंत्रण या प्रस्ताव।
2. आमंत्रण या प्रस्ताव की स्वीकृति।
3. संभोगरत होना।

Sambhog Ki Vishishat Jaankari Aur 10 Khas Vidhiyan

(क.) संभोग के लिए आमंत्रण- कुछ नायक ‘सेक्स के लिए’ खुले शब्दों में प्रस्ताव रख देते हैं या आमंत्रित कर देते हैं। यह उचित नहीं, भले ही नायिका अपनी पत्नी ही क्यों न हो और वह इसे स्वीकार ही क्यों न कर ले। एक कुशल नायक के लिए यह विधि प्रशंसनीय नहीं है।

नायक को चाहिए कि पहले काम संबंधी बातें करे, फिर पिछले मैथुन संबंधी घटनाओं की चर्चा करे। सेक्स में नायिका को हराकर स्वयं वियजी होने का दावा करे। इस बीच दोनों हाथों से स्तन मर्दन आदि कामकेन्द्रों का सहलाना, गालों का चुम्बन, बालों में अपनी अंगुलियों को उलझाने जैसे काम करे।

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यदि इन व्यवहारों से नायिका अंदर से कामोत्तेजित हो रही होगी, तो आपके हाथ उसकी भग तक की पहुंच जाये तो विरोध नहीं करेगी, बल्कि शरीर को भी शिथिल कर देगी। आप समझ जायें कि आमंत्रण स्वीकार है। यदि ऐसा न होकर कुछ विरोध करे, तो समझें कि अभी नायिका मैथुन के लिए तैयार नहीं है। इसलिए कुछ और करना होगा। आलिंगन करें, संवेदनशील अंगों को सहलाये, इससे मिनटों में नायिका आमंत्रण स्वीकार करेगी और नायिका शारीरिक मिलन के लिए तैयार हो जायेगी।

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(ख.) आमंत्रण या प्रस्ताव की स्वीकृति- अधिकतर आमंत्रण नायक द्वारा दिया जाता है, लेकिन नायक-नायिका, पति-पत्नी हों या दोनों एक-दूसरे के साथ खुल चुके हों, तो नायिका भी प्रस्ताव रखने में पीछे नहीं हटती है। यदि अर्थ भरी दृष्टि से नायिका नायक की ओर बार-बार देखे, अंगड़ाईयां बार-बार ले, बदन टूटने का संकेत दे, जम्हाईयां ले, जान-बूझकर शरीर से कपड़े उठाकर लापरवाही या असावधानी का प्रदर्शन करे तो समझें कि नायिका अपने नायक को ’मिलन’ के लिए आमंत्रित कर रही है। इस समय सामान्य आलिंगन से भी नायिक लिपट जाती है। योनि से तरल स्रावित होने लगता है। नायिका आंखें बंद करके नायक की बांहों में शिथिल हो जाये और योनि स्राव प्रारम्भ हो जाये तो समझें नायिका की ओर से प्रस्ताव स्वीकृत है। ठीक इसी प्रकार यदि नायक का शिश्न उत्तेजित हो चुका हो, तो नायिका को भी समझ लेना चाहिए कि नायक कामातुर हो चुका है। उसको प्रस्ताव स्वीकृत है।

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(ग.) संभोगरत होना- जब दोनों कामातुर हो जायें, तो शारीरिक संबंध बन जाने जैसी घटना का घटित होना स्वाभाविक है। दोनों दैहिक संबंध में रत हो जाते हैं और एक-दूसरे में खो जाना चाहते हैं।

यह सेक्स भी कई प्रकार के होते हैं, जिनमें महर्षि वात्स्यायन ने निम्न दस प्रकार के संभोग की मान्यता विशेष रूप से दी है:-

1. सम्पुट- इस विधि में नायक पूरे लिंग को योनि में प्रवेश करता ओर घुमाता है। जब स्खलित होने लगता है, तो नायिका अपनी दोनों जांघों को दबाकर योनि को संकुचित कर लेती है। ऐसा करने से लिंग भी दबा होता है और ऐसा प्रतीत होता है कि योनि, लिंग से स्खलित हो रहे वीर्य को पूर्णतः चूसने के लिए प्रयासरत है।

2. मन्थन- इस विधि से नायिका योनि स्थिर रखकर लेट जाती है। नायक उत्तेजित लिंग को पकड़ कर नायिका की योनि में प्रविष्ट करार इस प्रकार घुमाता है जैसे कि योनि मथनी हो और लिंग मथानी। यद्यपि यह विधि खड़े होकर भी अपनायी जा सकती है, लेकिन नायिका को लेटी अवस्था में कुछ अधिक सुविधाजनक और आनंददायक महसूस होता है।

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3. उपसृप्तक- इसमें नायक योनि में लिंग धीरे-धीरे प्रवेश करता है। लिंग के प्रवेश करने के बाद धीरे-धीरे बाहर निकालता और पुनः प्रवेश करता है। इस क्रिया को प्रारम्भ में धीरे-धीरे किया जाता है। फिर बाद में क्रमशः प्रक्रिया तेज होने लगती है। स्खलित होने के समय लिंग अंदर-बाहर करने की चरमसीमा पर होती है।

4. वृषाघात- योनि के दोनों पाश्र्व भाग, बांयें और दांयें को पर्यायक्रम से घर्षण करते हुए जब लिंग योनि में अंदर-बाहर होता है, तो पाश्वों पर एक प्रकार का आघात का प्रहार होता है। इस प्रकार के आघात सहित मैथुन को वृषाघात सेक्स कहते हैं।

5. निर्घात- इस विधि में नायक पहले योनि में पूरे लिंग को प्रवेश करता है। फिर कुछ बाहर निकाल लेता है और फिर धक्का लगा कर लिंग को योनि के अंदर डालता है। इस क्रिया को बार-बार करता है। इस विधि में नायक धक्का तो बार-बार मारता है, लेकिन योनि के दोनों प्राश्र्वभाग पूर्णतः आघातयुक्त हो जाते हैं। इसीलिए इस विधि को निर्घात विधि कहते हैं।

6. वराहाघात- नायिका की योनि में नायक लिंग प्रवेश करे। यदि एक ही पाश्र्व को जोर-जोर से रगड़े, दूसरे भाग को सुरक्षित छोड़ता रहे, तो ठीक वैसे ही जैसे सुअर जमीन खोदते समय करता है। इस विधि को वराहाघात विधि कहते हैं।

7. हुल- इस विधि में नायिका की कमर को नीचा करके नायक शिश्न को एक ही प्रेशर में योनि में प्रवेश करता है। लेकिन योनि में पूरा लिंग समा नहीं पाता है, क्योंकि कमर नीची होती है। अतः योनि के आधे भाग तक ही शिश्न प्रवेश कर पाता है।

8. पीड़ितक- इस विधि में नायक एक ही जोर में पूरे शिश्न को योनि में प्रविष्ट करवा कर बार-बार(अनवरत रूप से) जोर-जोर से आंदोलित होकर तन का मिलन करता है। इस आघात के साथ किये गये दैहिक मिलन से नायिका पीड़ित तक हो जाती है, इसीलिए इस प्रकार की सेक्स विधि को पीड़ितक कहते हैं।

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9. अवमर्दन- इस विधि में नायिका उध्र्वमुख(मुख ऊपर की ओर) स्थिति में जांघों को ऊपर करके लेट जाती है। इस स्थिति में योनिमुख सामने नायक की ओर होता है। नायक उत्तेजित शिश्न को एक ही आघात में योनि में प्रवेश कर देता है। इस विधि को अवमर्दन कहते हैं।

10. चटक विलसित- इसमें नायक, नायिका की योनि में शिश्न प्रविष्ट करके, फिर थोड़ा-सा निकाल लेता है एवं ऊपर-नीचे, दायें-बांये रूक-रूक कर आघात करता और घर्षण करता है। इस स्थिति में नायक-नायिका दोनों ही उत्तेजित हो जाते हैं। कामोत्तेजना में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है।

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