Sambhog Ka Anand Badhane Ke Liye Desi Upay

Sambhog Ka Anand Badhane Ke Liye Desi Upay

संभोग का आनंद बढ़ाने के लिए देसी उपाय

संभोग(Sexual Intercourse)-

आइये पहले समझ लें कि वास्तव में संभोग है क्या? अब आप कहेंगे कि स्त्री और पुरूष जो सेक्स करते हैं उसे संभोग कहते हैं। वैसे एक तरह से देखा जाये तो आप सही हैं, किन्तु अगर सही मायनों में अगर संभोग को परिभाषित किया जाये तो मैं कहूंगा कि केवल सेक्स करना ही संभोग नहीं है। सेक्स तो जानवर भी कर लेते हैं, तो उसे परिपूर्ण रूप से संभोग मान लेना उचित नहीं होगा।
संभोग का संधिविच्छेद किया जाये तो वास्तविक अर्थ बनता है सम + भोग। यहां सम से मतलब है समान और भोग से मतलब है सेक्ससुख। यानी ऐसा भोग, ऐसा सेक्स, जिसमें स्त्री और पुरूष को समान रूप से आनंद प्राप्त हो। दोनों की तृप्ति और आनंद ही संभोग का मूल आधार है। यदि दोनों में से कोई भी एक भोग का आनंद नहीं ले पा रहा है, तो इसे संभोग की परिभाषा नहीं कहेंगे।
तो आइये इसी संभोग के आनंद को बढ़ाने के कुछ सफल योग के बारे में आपको बता दें..

आप यह हिंदी लेख sambhog.co.in पर पढ़ रहे हैं..

संभोगानन्द के सफल योग-

sambhog.co.in

नारी के सुगठित, सुडौल नग्न शरीर में जो आकर्षण एवं मादकता है, वह संसार की किसी अन्य वस्तु में नहीं। वास्तविक सौंदर्य, लावण्य एवं आकर्षण की प्राकृतिक झलक नर-नारी के सम्पूर्ण नग्न शरीर में ही दिखाई देती है। सम्पूर्ण नग्नता में यौनाकर्षण अपने वास्तविक रूप में निखरता और भरता है। लेकिन इससे हमारा मतलब या उद्देश्य यह बिल्कुल नहीं है, कि आप अपने पुरूष पार्टनर या महिला पार्टनर पर पूर्णतः निर्वस्त्र होने के लिए दबाव बनायें या कोई जोर जबरदस्ती करें। हम यहां केवल अपना एक विचार व सलाह मात्र दे रहे हैं, जिसको मानने के लिए आप पर किसी प्रकार का कोई दबाव हमारी ओर से नहीं है। और वैसे भी जोर-जबरदस्ती से किया गया संभोग आपको कोई भी वास्तविक आनंद नहीं देगा। संभोग तो एक-दूसरे को विश्वास में लेकर, प्रेम और संयम से किया जाये, तो इसका आनंद ही दोगुना हो जाता है। अन्यथा संभोग, संभोग नहीं रहता, बलात्कार का रूप ले लेता है। साथ ही आपके रिश्तों में मधुरता की बजाये कड़वाहट आ जाती है। संभोग में एक-दूसरे की इच्छा का सम्मान रखना ही पहला एक मात्र उद्देश्य आपका होना चाहिए।

1. हरे माजू 2 ग्राम, श्वेत कनेर की जड़ की छाल 6 ग्राम, दाना लाख 2 ग्राम, काली मिर्च 2 ग्राम तथा विशुद्ध अफीम 6 ग्राम। इन औषधियों को भली-भांति खरल करके जंगली बेर के बराबर गोलियां बना लें। 2 गोलियां पानी में घिसकर संभोग से एक घण्टा पूर्व नाभि पर लगायें। रति आनंद पैदा करने के लिए रामबाण याग है।

2. पिसी दालचीनी 500 मि.ग्रा. सुबह-शाम गाय के दूध के साथ लेने से मैथुन आनंद एवं स्तम्भन शक्ति प्राप्त होती है।

3. बड़ी कटेली के फल आधा किलो, धतूरे के बीज 125 ग्राम, नीम के बीज 250 ग्राम, लान कनेर के फूल 125 ग्राम, खसखस डोडा खाली 600 ग्राम, सफेद कनेर के फूल 125 ग्राम, बैंगन के बीज 125 ग्राम, कौंच के बीज 125 ग्राम। इन सभी औषधियों को मोटा-मोटा कूटर ढाई किलो गाय के दूध में उबाल कर छान लें। उसके बाद इस दूध का दही जमाकर मक्खन निकालें। इन्द्री, जांघ के जोड़ पेडू एवं अण्डकोषों पर रोजाना इस मक्खन की मालिश करने से शीघ्रपतन का रोग दूर हो जाता है। रति आनंद में बढ़ोतरी करने के लिए सहवास से एक घंटा पूर्व पांव के तलवे पर इसकी मालिश करें।

4. बबूल का भुना गोंद 3 ग्राम, शुद्ध भांग 12 ग्राम, केसर डेढ़ ग्राम, मस्तगी 3 ग्राम, जामुन की गुठली की गिरी 6 ग्राम, जायफल 3 ग्राम, चुनिया गोंद 3 ग्राम, इमली के बीजों की गिरी 6 ग्राम, कुन्दर 3 ग्राम। इन सबको गुलाब जल में खरल करके चने के बराबर गोलियां बना लें। 2-3 गोलियां रात को सोते समय दूध के साथ खाने से शीघ्रपतन दूर हो जाता है तथा स्तम्भन एवं रति आनंद शक्ति उत्पन्न करने में अति उत्तम है।

5. शहद, जायफल, अफीम, शिंगरफ रूमी तथा अकरकरा सभी को कूट-पीसकर शहद की सहायता से मूंग के बराबर गोलियां बनायें। संभोग से आधा घंटा पहले एक गोली पाव भर गाय के दूध के साथ खायें। शीघ्रपतन दूर होकर मैथुन आनंद प्राप्त होता है।

यह भी पढ़ें- धातु रोग

6. सलारस(जरू वृक्ष की गोंद) 6 ग्राम, इत्र गुलाब 20 बूंद, पिसी फिटकरी 6 ग्राम। उबलते पानी में औषधि का बर्तन इस तरह रखें कि उबलता पानी औषधि में न पड़े। जब दवा पिघल जाये तो नीचे उतार लें। रतिक्रिया से पूर्व थोड़ी-सी दवा की लिंग पर मालिश करें ताकि औषधि लिंग द्वारा शोषित हो जाये। इसके प्रयोग से संभोग में दोनों पक्षों को अपूर्व आनंद प्राप्त होता है। वीर्य स्खलन भी काफी देर में होता है।

7. लोबान 6 ग्राम, काले धतूरे के शुद्ध बीज 12 ग्राम, जदाबर 12 ग्राम, शुद्ध शिंगरफ 12 ग्राम, भंग के बीज 25 ग्राम, काफूर 12 ग्राम, केसर 3 ग्राम, चरस 3 ग्राम, अफीम 6 ग्राम, अजवायन खुरासानी 6 ग्राम। इन सबको बारीक पीस एवं खरल करके पानी की सहायता से चने के बराबर गोलियां बना लें। 1-1 गोली सुबह-शाम ताजा जल अथवा दूध के साथ खायें। संभोग के समय आनंद में वृद्धि करने के लिए ये गोलियां चमत्कारी हैं। शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, वीर्य प्रमेह आद को दूर करके वृद्धावस्था में भी मर्दाना शक्ति उत्पन्न करती है।

8. नेपाली कस्तूरी, केसर असली, जायफल प्रत्येक समान मात्रा में पीसकर शहद की सहायता से चने के बराबर गोलियां बना लें। संभोग से दो घंटा पूर्व एक गोली दूध से खाकर लगा हुआ पान खायें। इस औषधि के सेवन से शीघ्रपतन रोग दूर होने के अतिरिक्त पुरूष काफी समय तक संभोगाघात कर सकता है।

9. कद्दू के बीजों की गिरी 200 ग्राम, फुन्दक के बीजों की गिरी 125 ग्राम, इलायची दाना 6 ग्राम, बादाम की गिरी बिना छिलका 175 ग्राम, असली तवाशीर 50 ग्राम, खसखस 125 ग्राम, चांदी के वर्क 5 ग्राम, शहद सब औषधियों के बराबर। सर्वप्रथम तवाशीर एवं इलायची को पीसकर इसमें चांदी के वर्क मिलाकर जोर से खरल करें। फिर शेष पिसी हुई औषधियां सम्मिलित करके जोर से खरल करके शहद मिला लें। 10 से 25 ग्राम प्रतिदिन दो बार पाव भर गर्म दूध से खायें। यह योग शीघ्रपतन को दूर करने में सर्वोत्तम है। इसके प्रयोग से काफी देर तक संभोग करने पर भी वीर्य स्खलन नहीं होता है एवं अत्यधिक मैथुन आनंद की प्राप्ति होती है।

सेक्स समस्या से संबंधित अन्य जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें..http://chetanonline.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *