Jane Sambhog Aur Sambhog Se Jude Niyam जानें संभोग और संभोग से जुड़े नियम

Jane Sambhog Aur Sambhog Se Jude Niyam जानें संभोग और संभोग से जुड़े नियम

Jane Sambhog Aur Sambhog Se Jude Niyam

संभोग क्या है?

वैसे देखा जाये, तो स्त्री और पुरूष के बीच गुप्ताआगों के मिलन में मिलने वाले सुख को ही सेक्स कहा जाता है। मगर सही मायनों में विचार किया जाये, तो सेक्स स्त्री और पुरूष दोनों को समान रूप से संतुष्टी प्रदान करने वाला साधन है।
यदि संधिविच्छेद किया जाये तो होता है सम+ भोग = संभोग। सम का अर्थ है समान और भोग का अर्थ केवल यहां पर सेक्स से है। यानी समान रूप से भोगने वाले आनंदमय भोग को ही संभोग कहा जाता है।
यदि सरल भाषा में कहा जाये, तो ऐसा सेक्स, ऐसा सेक्स जिसमें स्त्री और पुरूष को समान यानी ऐसा जैसा आनंद प्राप्त हो, दोनों ही एक-दूसरे से संतुष्ट हों। वही सही मायने में शारीरिक मिलन है।

नियम-

आपको शायद थोड़ी हैरानी हो, कि शारीरिक मिलन के भी अपने एक खास नियम, तौरतरीके हाते हैं। सेक्स रिलेशन का अर्थ केवल इतना ही नहीं है कि स्त्री-पुरूष मिले और एकाएक सेक्स रिलेशन के लिए तत्पर हो गये। फिर कुछ ही मिनटों में चरम को प्राप्त होकर मुंह फेरकर सो गये या उठकर बाहर निकल गये।

सेक्स इन सब बातों से कई परे है, अगर इस पर सही से अमल किया जाये, तो। अन्यथा मैथुन तो जानवर भी कर लेते हैं। हमे ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए कि उसने हमें मनुष्य योनि में जन्म दिया। मनुष्य इस धरती का सबसे बुद्धिमान जीव है, जिसे ईश्वर से बहुत कुछ प्राप्त है। जिसमें एक गुण मैथुन को महूसस करने व मैथुन करने का भी है,
इसलिए मैथुन से जुड़े कुछ नियमों का पालन करना भी आवश्यक हो जाता है।

तो आईए जानते हैं क्या हैं सेक्स के नियम..

1. सेक्स के लिए निर्धारित आयु- पुरूष को 25 वर्ष से पहले और स्त्री को 16 वर्ष से कम आयु में मैथुन नहीं करना चाहिए।

2. इन स्त्रियों के साथ आयुर्वेदामतानुसार सेक्स करना उचित नहीं है-
1. वेश्या, 2. रजस्वला, 3. अपने पसंद की जो न हो, 4. इच्छा के विरूद्ध आचरण करने वाली, 5. स्वभाव से दुष्ट और संकीर्ण योनि वाली, 6. बहुत मोटी, 7. बहुत पतली, 8. बच्चा होने के बाद 6 मास तक, 9. गर्भवती स्त्री से, 10. दूसरे की स्त्री, 11. सन्यासिनी, 12. अन्य जाति की, 13. अपने से अधिक आयु वाली के साथ मैथुन करने से शारीरिक आरोग्यता नष्ट हो जाती है।

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मैथुन संबंधी आयुर्वेद के कुछ सूत्र

1. इन स्थानों में शारीरिक मिलन न करें- गुरू के आश्रम या घर में, देव स्थान में और राजा के स्थान(घर में), श्मशान घाट में, चैराहे पर, जल के ऊपर या भीतर, त्यौहार के दिन, दोपहर में, किसी के देखे जाने वाले स्थान पर।

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2. पुरूष को निम्न अवस्था में सेक्स नहीं करना चाहिए- भूखा होने पर, प्यासा होने पर, अधैर्य अवस्था में(जब किसी कारण से धैर्य टूट रहा हो), अधिक खा लेने के बाद, बेचैनी की अवस्था में, आयु कम होने पर या आयु अधिक होने पर(वृद्धावस्था में), मूत्र या मल के वेग की अवस्था में सेक्स नहीं करना चाहिए। यानी जब बहुत तीव्र रूप से मल या मूत्र लगा हो, तो इसे रोक कर सेक्स
नहीं करना चाहिए।

शीतकाल में- वीर्यवर्द्धक भोजन और औषध सेवन करके इच्छानुसार सेक्स करना चाहिए।
बसंत और शरद ऋतु में- 3 दिन छोड़कर मैथुन करना चाहिए।

गर्मी के मौसम में- मैथुन नहीं करना चाहिए। विशेष परिस्थिति में 15 दिन के अंतराल में मैथुन करना चाहिए।

नियम विरूद्ध सेक्स करने से निम्न रोग हो सकते हैं-
1. भ्रम
2. थकावट
3. पैरों की कमजोरी
4. बल का क्षय
5. धातुक्षय
6. इन्द्रियों का क्षय
7. अकाल मृत्यु आदि।

नियमानुसार सेक्स करने वालों को निम्न लाभ होते हैं-
1. स्मृति की वृद्धि
2. मेधा की वृद्धि
3. आरोग्यता की वृद्धि
4. आयु की वृद्धि
5. शरीर की पुष्टता
6. इन्द्रियों की कार्यक्षमता
7. यश की वृद्धि
8. बल की वृद्धि
9. बुढ़ापे का न आना अर्थात् आयु का प्रभाव देर से प्रकट होना आदि।

सेक्स कब और कैसे करें?

यद्यपि नायक-नायिका यानी स्त्री-पुरूष के बीच मिलने की स्वतंत्रता हो तो सभी नियम ज्यों के त्यों धरे रह जाते हैं। मात्र दोनों के विचार एवं सहमति की ही प्रधानता होती है। फिर भी स्वास्थ्य की दृष्टि से कुछ सिद्धांत अपनयो जायें तो अच्छा है।

1. जब शारीरिक मिलन की इच्छा पूर्ण जागृत हो जाये तभी मैथुन करें। यह आवश्यक नहीं कि नायक-नायिका को अवसर मिले या पति-पत्नी का संबंध हो तो इसी को प्रधानता दें।

2. भोजन के कम से कम ढाई से तीन घण्टे बाद ही शारीरिक मिलन करें।

3. जब भूख-प्यास से पीड़ित हों या मल-मूत्र का वेग हो, तो शारीरिक मिलन में रत होना उचित नहीं है।

4. शारीरिक मिलन के समय शारीरिक और मानसिक रूप से प्रसन्न होना चाहिए। शरीर के वस्त्र स्वच्छ एवं आरामदायक हों। यदि संभव हो वस्त्रों पर इत्र लगा लें।

5. जब नायक-नायिका अथार्त् स्त्री-पुरूष पूरी तरह से उत्तेजित अवस्था में आ जायें, तो उसके बाद ही मैथुन करना उचित होता है। इसके विपरीत यानी बिना पूर्ण उत्तेजना के दैहिक संबंध में आप असफल भी हो सकते हैं।

6. मैथुन के बाद दोनों को अपनी-अपनी जनेन्द्रिय को कुनकुन पानी से धोना चाहिए। मैथुन के तुरन्त बाद जनेन्द्रिय पर ठंडा पानी नहीं इस्तेमाल करना चाहिए, ये हानिकारक हो सकता है।

7. यदि मौसम ठंडा हो तो जनेन्द्रिय को साफ करने के तुरन्त बाद घर से बाहर जाना उचित नहीं है, क्योंकि सेक्स के समय नायक नायिका दोनों का शरीर गर्म होता है। यदि इस स्थिति में ठंडी हवा लग जाये, तो फेफड़ों संबंधी एवं अन्य कई तरह के रोग हो जाते हैं।
8. जनेन्द्रिय की सफाई के बाद नायक-नायिका को मिश्री मिला गरम दूध या ऐसे ही अन्य ‘शुक्र और शक्तिवर्धक’ पेय लेना चाहिए। इससे शरीर पुनः शक्तिकृत हो जाता है और थकान नहीं होती है। यदि नायक नायिका पति-पत्नी हों, तो एक-दूसरे के साथ बैठकर या लेट कर गुजरे क्षणों के संबंध में(काम संबंधी) बातें करनी चाहिए।
9. सेक्स एकांत में करना चाहिए। प्रदर्शित सेक्स जो अश्लीलता की सीमा लांघ चुका हो, मर्यादित नहीं कहा जा सकता है।

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