Aurat Ki Sex Me Iccha Na Hone Ke Karan Kya Hai

Aurat Ki Sex Me Iccha Na Hone Ke Karan Kya Hai

औरत की सेक्स में इच्छा न होने के कारण क्या हैं?

स्त्रियों में संभोग की इच्छा न होना, कामेच्छा की कमी-
(Female Sexual Dysfunction)

आज के समय में 44 प्रतिशत स्त्रियां किसी न किसी रूप में अनेच्छा एवं ‘काम’(संभोग, सेक्स) के प्रति शीतलता का शिकार हैं। स्त्रियों का यह रोग पुरूषों की नपुंसकता से मिलता-जुलता है। इसे दो प्रकार में विभाजित किया जा सकता है-
1. पूर्ण कामशीलता(Complete Frigidity)- ऐसी स्त्रियां संभोग या प्रेमादि में किसी प्रकार का आकर्षण एवं आनंद प्रतीत नहीं करती हैं।

2. अपूर्ण या अस्थाई कामशीलता(Relatively frigidity)- ऐसी स्त्रियों में संभोग इच्छा कभी-कभार पाई जाती है। ऐसी स्त्रियों में कामोत्तेजित होने की योग्यता पाई जाती है, परन्तु मस्तिष्क में कोई न कोई ग्रन्थि अवश्य होती है, जिससे धीरे-धीरे पूर्ण कामशीलता उत्पन्न हो जाती है। यदि उचित मानसिक नियमों का प्रयोग किया जाये तो कामशीतल स्त्रियों में कामोत्तेजना जागृत की जा सकती है।

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पाप भरा कत्र्तव्य- ताली सदैव दोनों हाथों से बजा करती है। अतः जब पति को यह अनुभव होता है कि उसकी अद्र्धागिनी इस क्रिया में केवल एक निष्क्रिय अंग की हैसियत रखती है या फिर उसकी पत्नी जो कुछ करती है केवल एक कत्र्तव्य समझ कर करती है, इसमें उसकी काम भावनाओं का कदापि समावेश नहीं होता है, तो तब परिणामस्वरूप उसका पति इस यान्त्रिक अंदाज से उकता कर दूसरे किराये के साथी की तलाश करने पर विवश हो जाता है, जिससे घरेलू जीवन कड़वा या नष्ट होकर रह जाता है।

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यद्यपि ये साथी भी पैसे के अधिक और हृदय के कम मित्र होते हैं। शराब की भांति उनका भी नशा शीघ्र ही उतर जाता है। काम-विज्ञान के विषय में गलतफहमी या अल्प ज्ञान ही इसका विशेष कारण है। सभ्यता एवं संस्कृति का गलत रिवाज जैसे पूर्व में कामभावनायें दबाते-दबाते उनका गला घोंट दिया जाता है, क्योंकि इसे घृणित विषय समझा जाता है और फिर इसे मान व शर्त के कीमती गहने का नाम दिया जाता है।

गृहस्थी की उलझनें और उसकी जिम्मेदारियां भी रूमानी कल्पनाओं को नष्ट करने के लिए काफी हैं। इसके लिए आवश्यक है कि दम्पत्ति हंसी-खुशी और चिंतामुक्त होकर जीवन बितायें। मध्यमवर्गीय परिवारों की घरेलू समस्यायें यद्यपि वह अपनी जगह स्थापित हैं। परन्तु यह भी तो संभावना एवं वश से बाहर नहीं कि वह अपने घरबार के झमेलों और चिन्ताओं से उन्मुक्त होकर थोड़ा-सा समय शुद्ध मनोरंजन के लिए समर्पित कर दिया करे। इस प्रकार काम भावनायें पूरी तरह जीवित व उद्दीप्त रहती हैं।

पूर्णतः कामानन्द प्राप्त करने के लिए दम्पत्ति के स्वभाव में एकरूपता एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाया करती है। स्वभावों का अंतर और बेमेल होना इस रोग का जन्मदाता है, इसलिए प्रत्येक दम्पत्ति को एक-दूसरे में अधिक से अधिक रूचि लेना और कामाकर्षण अनुभव करना आवश्यक है। परन्तु जब पत्नी, पति से घृणा या अनाकर्षण करने लगती है तो मिलनपूर्ण तथा सफल संभोग लगभग असंभव-सा हो जाता है। ऐसी अवस्था में दूसरी पसंदीदा शादी स्त्री की अनेच्छा दूर करके पूर्ण संभोग का आनंद दे सकती है।

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यह बात याद रखने की है कि जिस प्रकार बांझपन इस रोग का कारण हो सकता है, उसी प्रकार इसके विपरीत कभी-कभी इसके कारण बांझपन हो जाता है, जिसका उपचार अति कठिन होता है।

संभोग से घृणा क्यों?

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कुछ स्त्रियां गर्भ की परेशानियों से बचने के लिए संभोग से बचती हैं। जिन स्त्रियों को बार-बार गर्भ हो जाता है, वे गर्भ के भय के कारण संभोग से ही भयभीत रहने लगती हैं और धीरे-धीरे यही बचाव स्वभाव बन जाता है। इसका उपचार यह है कि ऐसी स्त्रियों को गर्भ के भय से जिस प्रकार भी हो सके, मुक्त कराने प्रयास किया जाये। उन्हें विश्वास दिलाया जाये और बताया जाये कि गर्भ एक प्राकृतिक वस्तु है। यह एक अनावश्यक वस्तु नहीं है, बल्कि जीवन में प्रसन्नतावर्द्धक परिवर्तन पैदा करने वाली वस्तु है।

कभी-कभार कौमार्य झिल्ली बहुत सख्त या मजबूत होती है, जिससे सुहागरात में संभोग के दौरान इतनी तीव्र पीड़ा होती है कि स्त्री को संभोग से भय मालूम होने लगता है। इस प्रकार वह अस्थायी कामशीलता की शिकार हो जाती है। इसका उपचार यह है कि 5 ग्रेन(1 ग्रेन = ) रत्ती) प्रति औंस वाले कोकेन साॅल्यूशन की योनि में लगाकर इतनी देर बाद संभोगरत होना चाहिए कि औषधि का प्रभाव आरम्भ हो जाये।

मनोवैज्ञानिक तौर पर ऐसी स्त्रियां योनि की ऐंठन रोग से ग्रस्त होने की योग्यता अधिक रखती हैं। जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि स्त्री जब अपनी इच्छा के विरूद्ध पति को पाती है। संभोग में तो वह समर्पण का प्रदर्शन करती है, परन्तु मानसिक रूप से संघर्ष करती है, अतः योनि की भीतरी ग्रन्थियों से रिसने वाला तरल कम से कम गीला होता है, जिससे संभोग में कोई नशा या स्वाद नहीं आता और दम्पत्ति वास्तविक आनन्द की प्राप्ति नहीं कर पाते हैं।

कभी-कभी इस रोग का कारण स्त्री की पूर्व यौन विकृतियां होती हैं, जिसमें हाथ ही अंगुलियों के अतिरिक्त, बैंगन, मोमबत्तियों, बालों के क्लिप व अन्य वस्तुओं से संभोगानन्द प्राप्त करते रहने होता है। इसके कारण उसे अधिक उत्तेजना और रगड़ की आदत होती है। पति से संभोग के समय वह उस अत्यधिक एवं असीम रगड़ से वंचित रहती है। इस कारण वह अपने को अतृप्त होने के साथ-साथ संभोग में असफल भी प्रतीत करने लगती है तथा कामशीलता का शिकार हो जाती है। यदि स्त्रियों द्वारा केवल पति के ऊपर भरोसा और विश्वास किया जाये तो पूर्व कुटेवों से छुटकारा पाने पश्चात् धीरे-धीरे स्वभाव मिल जायेगा और उन्हें पति से ही पूर्ण तृप्ति भी मिलने लगेगी।

विवाह के पश्चात् पति की नपुंसकता भी पूरी तरह प्रभावकारी सिद्ध होती है, अतः ऐसी अवस्था में पूर्ण अर्थात् स्थाई कामशीलता छा जाती है। परन्तु ऐसी स्त्रियों को जब अन्य पुरूषों से वास्ता पड़ता है, तो कुछ आरम्भिक दिनों में तो अवश्य यह ठंडापन छाया रहता है, परन्तु धीरे-धीरे कामोत्तेजना जागृत हो जाती है।

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बलात्कार, किसी विशेष पुरूष का कठोर व निर्मम व्यवहार तथा अत्यधिक अपेक्षाभाव आदि भी स्त्री को कामशीतल कर देता है। यदि यह अनुभव नारी को बाल्यावस्था में हुआ हो तो मनुष्य पर और भी गहरी छाप छोड़ जाता है। जो स्त्रियां समलैंगिक मैथुन अथवा अन्य अप्राकृतिक मैथुन में ही विशेष रूचि रखती हैं, वह भी प्रायः कामशीतलता का शिकार हो जाती हैं। ये भी ऐसी श्रेणी की स्त्रियां हैं, जो पुरूष मात्र से भय खाकर दूर भागती हैं एवं समस्त पुरूष जाति को अति तीव्र घृणा की दृष्टि से देखती हैं। प्रायः ऐसा भी देखा गया है कि उच्च शिक्षा प्राप्त स्त्रियों से कम पढ़ी-लिखी स्त्रियों की अपेक्षा कम कामशीतलता पाई जाती है। कुछ स्त्रियां अपनी इच्छा के अनुसार एक विशेष प्रकार के वातावरण में संभोग की कामना रखती हैं। यदि उन्हें अपनी इच्छा का यह वातावरण न मिले तो वह ठंडी और काम के विरूद्ध बनी रहती हैं।

एक मनोचिकित्सक के अनुसार उनके पास एक दम्पत्ति ने आकर बताया कि उनके विवाह को करीब 4 वर्ष व्यतीत हो चुके हैं, परन्तु इन 4 वर्षों में पत्नी ने एक बार भी संभोग का आनंद महसूस नहीं किया है। मनोवैज्ञानिक ने पूछताछ के पश्चात् यह निष्कर्ष निकाला कि पत्नी किसी साहस एवं मर्दानगी की अवस्था में संभोग करना चाहती है।

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अतः उसने इस संबंध में पति से बातचीत की और कुछ सलाह दी। उसी पति-पत्नी की सलाह के अनुसार पति ने पत्नी को एक दिन स्नानगृह में पकड़ लिया और उसके बहुत इंकार करने पर भी उसे जबरन वहीं जमीन लेटा कर बलात्कार की तरह संभोग किया। फिर तो पत्नी ने इतनी उत्तेजना अनुभव की थी कि वह स्वयं इस नये अनुभव पर दंग रह गई। बाद में उसे साधारण अवस्था में किये जाने वाले संभोग में भी आनंद की प्राप्ति होने लगी। यह तय है कि झिझक की गांठ एक बार खुलने पर सदैव के लिए खुल जाती है।

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